बैटरी वाला सोलर लगवाने से पहले ये जान लेना ज़रूरी है – वरना पछताना पड़ेगा!

Updated on: June 20, 2025 | By S.K. Gupta

जब भी आप अपने घर, दुकान या किसी छोटे बिज़नेस के लिए सोलर सिस्टम लगवाने की सोचते हैं, तो दो ऑप्शन होते हैं – ऑन ग्रिड और ऑफ ग्रिड। अगर आप ऐसे एरिया में रहते हैं जहां बिजली की कटौती ज्यादा होती है या बिल्कुल भी लाइन नहीं आती, तो Off-Grid यानी बैटरी वाला सोलर सिस्टम सबसे सही विकल्प होता है। इस सिस्टम में तीन जरूरी चीजें होती हैं – सोलर पैनल, इनवर्टर और बैटरी। पैनल सूरज की रोशनी से बिजली बनाता है, इनवर्टर उसे AC करंट में बदलता है और बैटरी उस बिजली को स्टोर करती है ताकि रात या खराब मौसम में भी बिजली मिलती रहे।

लेकिन यहां एक बहुत अहम बात जानना ज़रूरी है, जिससे बहुत लोग अंजान होते हैं — हमेशा कोशिश करें कि इनवर्टर और बैटरी एक ही कंपनी के लगवाएं।

  • इनवर्टर और बैटरी सेम कंपनी के क्यों हों?

जब आप Off-Grid सोलर लगवा रहे हों, तो आपके पूरे सिस्टम की परफॉर्मेंस इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स एक-दूसरे के साथ कितनी अच्छे से काम कर रहे हैं। अगर आपका इनवर्टर किसी कंपनी का है और बैटरी किसी दूसरी कंपनी की, तो कई बार दोनों में कंपैटिबिलिटी की दिक्कत आ जाती है। खासकर तब जब कोई समस्या आती है — जैसे बैटरी ठीक से चार्ज नहीं हो रही, इनवर्टर ओवरलोड दिखा रहा है या बैकअप समय कम हो गया है।

ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी परेशानी ये होती है कि आप तय ही नहीं कर पाते कि सर्विस के लिए किसे बुलाएं। बैटरी वाला कहेगा कि इनवर्टर की गलती है और इनवर्टर वाला कहेगा कि बैटरी खराब है। अब ग्राहक बेचारा चक्कर काटता रह जाता है। लेकिन अगर दोनों एक ही कंपनी के हैं, तो पूरी ज़िम्मेदारी उसी कंपनी की बनती है — सर्विस कॉल में कोई कन्फ्यूजन नहीं होता, न ही टालमटोल।

  • Same ब्रांड होने के और भी फायदे
  1. बेहतर परफॉर्मेंस – एक ही कंपनी के इनवर्टर और बैटरी आपस में सेटिंग्स के लेवल पर पूरी तरह मेल खाते हैं। जैसे चार्जिंग कट-ऑफ, डिस्चार्ज लिमिट आदि पहले से प्री-सेट होते हैं।
  2. सर्विस में आसानी – सर्विस इंजीनियर जब आता है तो वो दोनों चीजों को साथ में चेक करता है, और झगड़ा नहीं होता कि “ये उसकी गलती है”।
  3. वारंटी क्लेम जल्दी होता है – एक ही ब्रांड की वजह से आपको अलग-अलग कंपनी से झंझट नहीं करना पड़ता।
  4. लॉन्ग टर्म शांति – जब सोलर एक बार सही से चलने लगता है, तो सालों तक कोई टेंशन नहीं रहती।
  • और अगर पैनल भी उसी कंपनी का हो, तो सोने पे सुहागा

कई कंपनियां अब कॉम्बो किट भी देने लगी हैं जिनमें पैनल, इनवर्टर और बैटरी तीनों एक ही ब्रांड के होते हैं। उदाहरण के लिए Luminous, Livguard, Exide जैसी कंपनियां अब पूरी किट देती हैं जिसमें इंस्टॉलेशन, वायरिंग और स्ट्रक्चर भी शामिल होता है। इससे पूरा सिस्टम ज़्यादा भरोसेमंद बनता है और आपको अलग-अलग चीज़ों के लिए अलग दुकान, अलग बिल और अलग वारंटी का झंझट नहीं होता।

तो अगर आप Off-Grid सोलर सिस्टम लगवाने जा रहे हैं, तो ये बात दिमाग़ में अच्छे से बैठा लीजिए —

इनवर्टर और बैटरी हमेशा एक ही कंपनी की लगवाएं।

यह एक छोटी सी सलाह है, लेकिन इससे आपका हजारों रुपये और बहुत सारा मानसिक तनाव बच सकता है। और अगर आप चाहें, तो पैनल भी उसी ब्रांड का लें, जिससे पूरे सिस्टम में तालमेल बना रहे और आपको कभी सर्विस या परफॉर्मेंस की शिकायत न हो।


लेखक के बारे में

S.K. Gupta पिछले 4 सालों से उत्तर प्रदेश में सोलर इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। वह न सिर्फ ग्राउंड लेवल पर सोलर इंस्टॉलेशन का अनुभव रखते हैं, बल्कि लोगों को सही सलाह देने में विश्वास रखते हैं ताकि वे सोलर लगवाने या सोलर बिजनेस शुरू करने से पहले पूरी जानकारी ले सकें। उनकी कोशिश रहती है कि हर आम आदमी तक सोलर की सही जानकारी आसान भाषा में पहुँचे।

Leave a Comment