क्या सोलर लगाने के बाद बिजली का बिल पूरी तरह खत्म हो जाता है?

आज के समय में जब बिजली के रेट लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लोग सोलर एनर्जी की तरफ तेज़ी से बढ़ रहे हैं। पर सबसे बड़ा सवाल ये है – क्या सोलर लगाने के बाद बिजली का बिल पूरी तरह खत्म हो जाता है? इसका जवाब है: हाँ, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि ऐसा कब और कैसे संभव है।
- सोलर से कैसे बनती है बिजली?
जब आप अपने घर पर On-Grid सोलर सिस्टम लगवाते हैं, तो वह दिन के समय सूरज की रोशनी से बिजली बनाता है। यह बिजली सीधे आपके घरेलू उपकरणों को चलाती है और अतिरिक्त बिजली को बिजली कंपनी के ग्रिड में भेज देता है, जिससे आपको net metering के ज़रिए क्रेडिट मिलता है।
बिल खत्म कब होता है? – जानिए गणित
बिल खत्म होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि:
- आपके घर की मासिक बिजली खपत कितनी है
- आपने कितने kW का सोलर सिस्टम लगवाया है
- आपका सिस्टम On-Grid है या Off-Grid
- एक आसान उदाहरण से समझते हैं:
मान लीजिए आपके घर में हर महीने 400 यूनिट बिजली की खपत होती है।
अब ध्यान दीजिए:
1kW का On-Grid सोलर सिस्टम रोज़ाना लगभग 4–5 यूनिट बिजली बनाता है।
यानी 1kW × 30 दिन = लगभग 120–150 यूनिट प्रति माह।
अब अगर आप 3kW का सोलर सिस्टम लगवाते हैं, तो यह बनाएगा:
3kW × 5 यूनिट × 30 दिन = 450 यूनिट प्रति माह
इसका मतलब, आपका सोलर सिस्टम आपकी पूरी 400 यूनिट की खपत को कवर कर रहा है।
बिल – 0 रु!
और जो 50 यूनिट एक्स्ट्रा बनी, वो अगले महीने के लिए carry forward हो जाएगी।
- एक और उदाहरण समझिए:
मान लीजिए आपके घर में हर महीने की बिजली खपत है 600 यूनिट।
अब आपके घर का बिजली कनेक्शन है 3kW का।
तो आप अधिकतम 3kW का ही सोलर सिस्टम लगा सकते हैं, जिससे आपको मिलेगी रोज़ाना 15 यूनिट की बिजली।
3kW × 5 यूनिट × 30 दिन = 450 यूनिट / महीने
लेकिन आपको चाहिए 600 यूनिट, यानी आपको 4kW का सोलर सिस्टम चाहिए।
इस स्थिति में आपको सबसे पहले अपने घर के बिजली कनेक्शन का लोड बढ़वाना पड़ेगा —
जैसे कि 3kW से बढ़ाकर 4kW।
अब अगर आपने 4kW सोलर लगवाया, तो:
4kW × 5 यूनिट × 30 दिन = 600 यूनिट / महीने
अब आपकी पूरी खपत कवर हो गई और बिजली का बिल 0 हो सकता है।
- On-Grid सोलर की लिमिट क्या है?
On-Grid सोलर सिस्टम में एक नियम होता है:
आप अपने घर में उतने kW का ही सोलर सिस्टम लगा सकते हैं जितना आपके बिजली कनेक्शन का sanctioned load है।
उससे कम kW का सोलर लगवा सकते हैं,
लेकिन ज़्यादा kW का नहीं लगवा सकते —
जब तक कि आप बिजली विभाग से load बढ़वा न लें।
इसलिए अगर आप ज्यादा यूनिट कवर करना चाहते हैं, तो पहले घर के बिजली लोड को बढ़वाइए और फिर उसी अनुसार सोलर लगवाइए।
On-Grid सिस्टम में Net Metering का रोल
- On-Grid सिस्टम में बिजली कंपनी से आपका Net Meter जुड़ा होता है।
- यह आपके द्वारा भेजी गई और ली गई बिजली का हिसाब रखता है।
- अगर आपने ज़्यादा बिजली भेजी, तो उसका क्रेडिट अगले महीने जुड़ता है।
- इससे आपके बिल में Zero या Negative बिल भी आ सकता है।
लेकिन ये बात ध्यान में रखें:
- On-Grid सिस्टम सिर्फ तब बिजली बनाएगा जब बिजली कंपनी की सप्लाई चालू होगी।
- अगर बिजली कट गई तो सोलर सिस्टम भी बंद हो जाएगा।
- Off-Grid या Hybrid सिस्टम में बैटरी के जरिए आप बिजली स्टोर कर सकते हैं, पर वह महंगे होते हैं।
क्या हमेशा बिल खत्म हो जाएगा?
नहीं। अगर:
- आपकी खपत बहुत ज़्यादा है लेकिन सोलर सिस्टम छोटा है
- आपका सिस्टम सही से maintain नहीं हो रहा है
- आपने Net Metering नहीं लगवाई है
- तो बिल आएगा। लेकिन वह बहुत कम होगा।
क्या करें ताकि बिल जीरो हो जाए?
- अपने मासिक यूनिट की खपत देखें
- उसी के अनुसार On-Grid सिस्टम का साइज चुनें
- Net Metering जरूर लगवाएं
- समय-समय पर सोलर पैनल की सफाई करें
निष्कर्ष:
अगर आपने सही सोलर सिस्टम लगाया है और Net Metering का लाभ लिया है, तो हाँ – सोलर लगाने के बाद आपका बिजली का बिल पूरी तरह खत्म हो सकता है।
यह एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट है जो आपको 6-7 साल में लागत वापसी और फिर 18-20 साल तक फ्री बिजली देता है।